तेज बारिश हो रही थी , पर मुझे छीटें अच्छीं लग रहीं थी। हाथ में गर्म चाय का प्याला था और कानो में इयरफोन से गिरिजा देवी की "बरसन लगी बदरिआ रूम झूम के " सुन रहा था। मैंने छोटू से कहा एक समोसा और दे दो भाई। तभी भागते हुए , सर पर दुप्पट्टा ओढ़े तुम भी उस चाय के दुकान के प्लास्टिक के नीचे खड़ी हो गयी।
तुम्हारा चेहरे पे हलकी सी बारिश की छीटें फिर भी आ रहीं थीं जिसे तुम बार बार दुपट्टे से पोछ रही थी। जिंदगी में पहली बार मैंने इतने करीब से किसी लड़की को देखा था और सोच रहा था सरलता से बढ़कर कुछ भी नहीं। तुम्हरी वो अंजानी सी बिखरी लटें , बारिश में हलकी सी भीगी हुई , तुमहरा वो हल्का सा परेशान होना , भीगा हुआ चेहरा जैसे अभी अभी काली खिली हो बरसात में , सच कहूँ तो नजरें हटाये नहीं हट रहीं थीं।
मुझे नहीं पता क्या हुआ पर मैंने पहली बार जीवन में किसी लड़की से पूछा चाय लेंगी ? तुमने मुझे देखा कुछ अजीब निगाहों से फिर दुपट्टे से बाल पोछने लगी।
छोटू समोसा लेके आ गया था , तुमने मुस्कुराकर कहा छोटू समोसा इधर दो और एक चाय भी। मैं भी मुस्कुराया , चाय आई , तुमने हलके कम्पन से प्याले को थामा , एक घूँट पिया और गुनगुनाने लगी " बरसन लगी बदरिया रूम झूम के ". !!!!
तुम्हारा चेहरे पे हलकी सी बारिश की छीटें फिर भी आ रहीं थीं जिसे तुम बार बार दुपट्टे से पोछ रही थी। जिंदगी में पहली बार मैंने इतने करीब से किसी लड़की को देखा था और सोच रहा था सरलता से बढ़कर कुछ भी नहीं। तुम्हरी वो अंजानी सी बिखरी लटें , बारिश में हलकी सी भीगी हुई , तुमहरा वो हल्का सा परेशान होना , भीगा हुआ चेहरा जैसे अभी अभी काली खिली हो बरसात में , सच कहूँ तो नजरें हटाये नहीं हट रहीं थीं।
मुझे नहीं पता क्या हुआ पर मैंने पहली बार जीवन में किसी लड़की से पूछा चाय लेंगी ? तुमने मुझे देखा कुछ अजीब निगाहों से फिर दुपट्टे से बाल पोछने लगी।
छोटू समोसा लेके आ गया था , तुमने मुस्कुराकर कहा छोटू समोसा इधर दो और एक चाय भी। मैं भी मुस्कुराया , चाय आई , तुमने हलके कम्पन से प्याले को थामा , एक घूँट पिया और गुनगुनाने लगी " बरसन लगी बदरिया रूम झूम के ". !!!!
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