सीन 1
सुबह की ठंडी ठंडी पछुआ हवा, स्टेशन के मुख्य द्वार पे दुनिया से बेखौफ मीठे मीठे सपनों में 5-6 बच्चे यही कोई 5-7 साल के। वाह क्या मजा आता है सुबह की नींद का और ऐसी ठंडी हवा का जून में। हज़ारों की तादात में गुजरते इंसान लेकिन ये बच्चे, उनके शोर से दूर अपनी दुनिया में झूला झूलते टॉफी खाते जमीन पे बेखौफ बहुत ही सुंदर लग रहे हैं। स्टेशन पे एक बहुत बड़ा पंखा लगा है, सबको लगता है सिर्फ लगता है वो हवा दे रहा है, इन बच्चों को भी। अब्दुल अपनी गाड़ी पे गोल गोल घूम रहा है उसके पैर नहीं है , बीच मे आवाज़ भी लगा रहा है उठ जाओ उठ जाओ, लेकिन ये तो अपनी ज़िंदगी के चंद सबसे खूबसूरत पलों में हैं, कहाँ उठने वाले! आस पास बैठे लोग भी नींद में झुल्ली मार ले रहे हैं।
सीन 2
मेस्सी और रोनाल्डो (दो सफाई कर्मचारी )प्रकट होते हैं एक चमकदार नारंगी जैकेट पहन के। उम्र होगी यही कोई 14-15 साल, और जिनकी आत्मा से लेकर शरीर, सब बादशाह और हनी सिंह के नाम है । भोसड़ी के उठ! उठ रे भोसड़ी! बेहद खूबसूरत 5-6 किक। ऐलिस अपने वंडरलैंड से जमाई लेते हुए मेस्सी और रोनाल्डो का दर्शन करती हैं। तभी दनादन एक दो गोल का और प्रयास, सब के सब स्वच्छ भारत मिशन के इन देवदूतों का दर्शन करते हैं। अब्दुल अब अपनी गाड़ी ठक ठक बजाने लगा है, उठ जो रे उठ! आ गईल गड़िया उठ! ऐलिस अभी भी वंडरलैंड के झूलों में झूल रही है और ये क्या आसमान से बरसात, जी हां स्टेशन के अंदर, सर्फ का पानी बोतल में और उसकी बरसात सिंदबाद जहाजियों पे। सब के सब कलियुग में वापिस, उठ के भाग रहे हैं, स्वच्छ भारत का बाहुबली आ गया है अपनी गाड़ी पे सवार, सबकुछ रौंद के पोछ डालेगा, चमका देगा दूध सी सफेदी से पूरी कायनात को। मेस्सी और रोनाल्डो अब पेनल्टी शूटआउट कर रहे हैं और एक एक करके गोल हो रहा है। ऐलिस उठ गई है और शायद फिर से दूसरे वंडरलैंड के लिए चल दी है। आस पास के लोग अब भी झुल्ली मार रहे हैं। मैं कविश का निंदिया सुन रहा हूँ।
सुबह की ठंडी ठंडी पछुआ हवा, स्टेशन के मुख्य द्वार पे दुनिया से बेखौफ मीठे मीठे सपनों में 5-6 बच्चे यही कोई 5-7 साल के। वाह क्या मजा आता है सुबह की नींद का और ऐसी ठंडी हवा का जून में। हज़ारों की तादात में गुजरते इंसान लेकिन ये बच्चे, उनके शोर से दूर अपनी दुनिया में झूला झूलते टॉफी खाते जमीन पे बेखौफ बहुत ही सुंदर लग रहे हैं। स्टेशन पे एक बहुत बड़ा पंखा लगा है, सबको लगता है सिर्फ लगता है वो हवा दे रहा है, इन बच्चों को भी। अब्दुल अपनी गाड़ी पे गोल गोल घूम रहा है उसके पैर नहीं है , बीच मे आवाज़ भी लगा रहा है उठ जाओ उठ जाओ, लेकिन ये तो अपनी ज़िंदगी के चंद सबसे खूबसूरत पलों में हैं, कहाँ उठने वाले! आस पास बैठे लोग भी नींद में झुल्ली मार ले रहे हैं।
सीन 2
मेस्सी और रोनाल्डो (दो सफाई कर्मचारी )प्रकट होते हैं एक चमकदार नारंगी जैकेट पहन के। उम्र होगी यही कोई 14-15 साल, और जिनकी आत्मा से लेकर शरीर, सब बादशाह और हनी सिंह के नाम है । भोसड़ी के उठ! उठ रे भोसड़ी! बेहद खूबसूरत 5-6 किक। ऐलिस अपने वंडरलैंड से जमाई लेते हुए मेस्सी और रोनाल्डो का दर्शन करती हैं। तभी दनादन एक दो गोल का और प्रयास, सब के सब स्वच्छ भारत मिशन के इन देवदूतों का दर्शन करते हैं। अब्दुल अब अपनी गाड़ी ठक ठक बजाने लगा है, उठ जो रे उठ! आ गईल गड़िया उठ! ऐलिस अभी भी वंडरलैंड के झूलों में झूल रही है और ये क्या आसमान से बरसात, जी हां स्टेशन के अंदर, सर्फ का पानी बोतल में और उसकी बरसात सिंदबाद जहाजियों पे। सब के सब कलियुग में वापिस, उठ के भाग रहे हैं, स्वच्छ भारत का बाहुबली आ गया है अपनी गाड़ी पे सवार, सबकुछ रौंद के पोछ डालेगा, चमका देगा दूध सी सफेदी से पूरी कायनात को। मेस्सी और रोनाल्डो अब पेनल्टी शूटआउट कर रहे हैं और एक एक करके गोल हो रहा है। ऐलिस उठ गई है और शायद फिर से दूसरे वंडरलैंड के लिए चल दी है। आस पास के लोग अब भी झुल्ली मार रहे हैं। मैं कविश का निंदिया सुन रहा हूँ।
What an observation! Beautiful depiction indeed.
ReplyDeleteThanks Bhaiya for reading!!
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