मैं अपने दिल को तसल्ली नहीं देना चाहता। ये दर्द से भरा साल है। हम सब ने अपने खोये हैं। बहुतों ने पुराने साथी और आने वाले साथी भी। मुझे बहुत कुछ सिखा गया २०२१। मुझे कुछ रिश्तों की अहमियत सिखाया और खोना चुनना सिखा गया। मै कहीं नहीं पहुंचना चाहता हूँ लेकिन मुझे समय दौड़ा रहा है और मैं रुक नहीं रहा। मैं पूरी कोशिश कर रहा हूँ प्रतीक कुहाड़ के गाने जैसा होना लेकिन अमित त्रिवेदी के पीछे भाग रहा हूँ। देखते हैं २०२२ जिसमे मुझे सिर्फ चुनौतियां दिख रहीं हैं मुझे क्या बनाता है। उम्मीद है मैं खोना सीख लूंगा और फिर कुछ जीत के बाज़ीगर बनूँगा :-)
आने वाला साल मुबारक हो आप सबको !
मै कहीं नहीं पहुंचना चाहता हूँ लेकिन मुझे समय दौड़ा रहा है!
ReplyDeleteAwesome lines!
Sometime you win, sometimes you learn.
ReplyDeleteNice Ankur !
ReplyDeleteTruth comes out unhindered, by itself, when heart speaks!
ReplyDeleteBanarsi babu, aapki Satire waali batein..wahh..
ReplyDeleteBazigar nahi aap toh Sikandar baniye ;)