Tuesday, 15 December 2020

अलविदा LC Ram सर



ये वो दौर था जब मैं एक मासूम बचपने से निकल कर शैतानी और दुनियादारी के बचपने  में प्रवेश कर रहा था। जी हाँ वही सातवीं से नौवीं क्लास का समय।  हमारे सातवीं क्लास का पहला दिन और एक डायनामिक शिक्षक क्लास में आते हैं, किसी को खड़ा करते हैं पूछते हैं  क्या नाम है बच्चा ?  पिताजी का नाम ? पिताजी का पेशा ? यहाँ तक तो ठीक था एक नया सवाल आता है।  गांव कहाँ है बच्चा ? ये प्रश्न पूछना हम सबके लिए नया था।  कुछ बच्चे अपने गांव का नाम नहीं बता पाते थे।  आज तो 50 % गांव देखें ही नहीं होंगे।  लेकिन आपको अपने रूट्स से जोड़ना श्री लाल चंद राम जी का उद्देश्य था।  और यह भी जानना की आप जिस क्षेत्र से हैं वहां के संघर्ष कैसे हैं। 

सर को विशेष कर याद किया जाता है उनके डेफिनिशन  प्रेम के कारण।  वो हर चीज़ को डिफाइन करवाते थे और कहीं न कहीं  यूनिक डेफिनिशंस भी होतीं थीँ।  मुझे आज भी diffusion की डेफिनिशन जुबान पे रटी हुई है।  मूवमेंट ऑफ़ मोलेक्युल्स फ्रॉम थे रीज़न ऑफ़ हायर कंसंट्रेशन टू द रीज़न ऑफ़ लोअर कंसंट्रेशन , टिल द कंसंट्रेशन इस  equalized इस कॉल्ड diffusion. ( इग्नोर माय हिंगलिश )

समझा भी देते थे,  थोड़े स्ट्रिक्ट थे लेकिन मन के बहुत अच्छे।  उनकी एक और खास बात थी की समझते हुए एक क्लास आगे का भी पढ़ा देते थे।  इलेक्ट्रान से मेरा इंट्रोडक्शन उन्होने ही कराया और  ऑफबाऊ सिद्धान्त से भी।  मुझे बहुत मानते भी थे :-) . 

खैर हम बड़े होने लगे, इंजीनियर बनने लगे , शायद बन भी गए ,और अब शायद कहीं किसी कोने में कोहरे को देख रहा हूँ खिड़की से दुनिया से दूर। आज सर दिख रहे हैं।  वो धूमिल यादें साफ़ हो रहीं हैं।  

दोपहर में सन्देश आया कहीं से , सर नहीं रहे।  कोरोना लील गया।

 मैंने कई बार सोचा एक बार उनसे मिलूं आशीर्वाद लूँ लेकिन समय नहीं निकला या मैंने नहीं निकाला।  उन्होंने अनगिनत छात्रों को इलेक्ट्रान से और उनके गांव से परिचित कराया। ये लिखते हुए मैं थोड़ा भावुक हूँ , अब लग रहा है वो दौर आने लगा है जब अपने जाने लगे हैं। ईश्वर हमे शक्ति दे इस  दौर को समझने की और LC Ram सर  की आत्मा को शांति प्रदान करे।