क्या तुम्हें याद है?
मार्च में जब आखिरी परीक्षा
खत्म होती थी,
हम महसूस करते थे
वो अद्धभुत दोपहर
जिसमे हम सपने बुनते थे
मम्मी के सो जाने पर
नागराज और ध्रुव के
महकते थे मंजर आम के
और वीडियो गेम की कैसेट
किराये पे आ जाती थी
खेलने और सिर्फ खेलने का
लाइसेंस था वो मार्च
फागुन की वो हवा
मेरे सबसे खूबसूरत यादों में है
क्योंकि मिल जाता था मुझे मेरा हेडफोन
जिसमे सुना करता था मैं लकी अली को
दिन रात सुबह शाम
जब तक प्लेयर की बैटरी चलती थी
शाम को ज़िन्दगी बस अलादीन और स्पाइडर मैन थी
और हर सुबह मेरी स्टार गीत माला
मेरी साईकल और दोस्तों के घर
जाग जाते थे हमारे तेंदुलकर और मैकग्राथ
बाजियां समोसे जलेबी की हर मैच पे
न कोई चिंता न उम्मीद
फागुन की हवा और आम के मंजर
बचपन का वो मार्च
बहुत याद आता है।
मार्च में जब आखिरी परीक्षा
खत्म होती थी,
हम महसूस करते थे
वो अद्धभुत दोपहर
जिसमे हम सपने बुनते थे
मम्मी के सो जाने पर
नागराज और ध्रुव के
महकते थे मंजर आम के
और वीडियो गेम की कैसेट
किराये पे आ जाती थी
खेलने और सिर्फ खेलने का
लाइसेंस था वो मार्च
फागुन की वो हवा
मेरे सबसे खूबसूरत यादों में है
क्योंकि मिल जाता था मुझे मेरा हेडफोन
जिसमे सुना करता था मैं लकी अली को
दिन रात सुबह शाम
जब तक प्लेयर की बैटरी चलती थी
शाम को ज़िन्दगी बस अलादीन और स्पाइडर मैन थी
और हर सुबह मेरी स्टार गीत माला
मेरी साईकल और दोस्तों के घर
जाग जाते थे हमारे तेंदुलकर और मैकग्राथ
बाजियां समोसे जलेबी की हर मैच पे
न कोई चिंता न उम्मीद
फागुन की हवा और आम के मंजर
बचपन का वो मार्च
बहुत याद आता है।
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