Sunday, 3 March 2024

मैं और मक्डोनल्ड कई सालों बाद

न जाने कई बरसों बाद McDonald रेस्टोरेंट गया। बेटा बोल रहा था की जंक अच्छी चीज़ नहीं लेकिन कभी कभी चलता है।  मुझे तुम्हारी याद आ रही थी क्यूंकि मैंने दशकों पहले सिर्फ तुम्हारे साथ काफ़ी की चुस्कियां लीं थीं। मै इस McDonald में गया और काउंटर पे बोला की काफ़ी और फ्रेंच फ्राइज दे दीजिये। काउंटर पे एक छोटी सी प्यारी सी लड़की ने कहा, इट्स सेल्फ सर्विस, प्लीज आर्डर फ्रॉम कीओस्क।  मैंने अजीब सा चेहरा बनाया और एक कंप्यूटर जैसी स्क्रीन पे चला गया और सोचने लगा की दुनिया बहुत बदल गयी है और मैं इसमें फिट नहीं होता।  खैर बड़ी मुश्किल से काफी की तलाश जारी की तभी उसकी आवाज़ आयी, सर कैन आयी हेल्प ? मै बोला आपने कहा सेल्फ सर्विस, वो बोली वी असिस्ट इफ नीडेड।  मै बोला ये बताईये कैसे कोई  बूढा आपके यहाँ आर्डर दे सकता है, ये तो बड़ा ही कठिन मामला है और अंग्रेजी में भी है।  वो बोली सर आयी विल गाइड यू। .उसने कहा की वो स्क्रीन टच नहीं कर सकती मुझे ही करना होगा।  मैंने स्क्रीन से आर्डर किया और मेरे सीट पे कुछ समय बाद खाने पीने का सामान  आया।  

पता नहीं जब मैंने अपनी काफी खत्म की तो ऐसे ही उसे धन्यवाद् देने का मन किया।  मै फिर से उसके काउंटर पे गया उसने कहा सर एनी प्रॉब्लम ? मैंने कहा नहीं जस्ट वांटेड टू थैंक यू फॉर द सपोर्ट।  उसने कहा सर आयी ऍम हियर टू कलेक्ट कैश ओनली। जब आप शुरुआत में आये और परेशां दिखे तो मेरे मैनेजर कैमरा से आपको देख रहे थे।  उन्हें लगा की मैंने आपको कुछ बुरा भला कहा है और वो मुझे थोड़ा सुनाये। फिर मैं आपकी हेल्प के लिए आयी।  होप आल गुड।  मैंने कहा मैं बिलकुल आपसे नाराज नहीं था बस खुद के लिए सोच रहा था की दुनिया कितनी बदल गयी है और मैं आज भी २००६ में हूँ।  

मैंने कहा प्लीज मैनेजर को बुलाइये।  मैनेजर आया और मैंने कहा।  आपकी ये स्टाफ बहुत ही अच्छी है।  इन्होने बहुत ही धैर्य से मुझे सपोर्ट किया। मै आपको और आपकी टीम का शुक्रिया करता हूँ लेकिन आपका सिस्टम थोड़ा काम्प्लेक्स है ओल्ड के लिए खास तौर से।  मैनेजर साहेब खुश हुए , और उन्हें जो शिकायत थी उस स्टाफ से वो दूर हुई।  वो स्टाफ बहुत ही खुश थी।  

मैंने जाते हुए सोचा , हमने बात करना और कृतज्ञ होना छोड़ दिया है।  ये क्लाइंट सर्विस मॉडल में सब कुछ एक बिज़नेस बन चुका है।  किसी को भी गरिया देना कितना आसान है , लेकिन हम भूल जाते हैं की सामने वाला इंसान है।  कितनी आसानी से हमें अंग्रेजी में गुस्सा आने लगा है।  अनगिनत वायरल होते वीडिओज़ दिखाते हैं की हम सब किसी जल्दी में कहीं पहुंचने के लेकिन शायद कहाँ पहुंचना है या पहुंच रहे हैं ये नहीं पता। 

मुझे जाते हुए उसकी मुस्कराहट कभी नहीं भूलेगी ! शुक्रिया !

Sunday, 3 September 2023

तुम और मैं - १

 तुम्हारे पास जब मैं पहली बार आया 

मैंने सोचा 

दुनिया को तुम्हारे  जैसे 

चन्दन सा महकता होना चाहिए 


पहली बार तुम्हारे हाथों को छुआ 

महसूस हुआ की 

 दुनिया को ऐसे ही नाजुक और गर्म होना चाहिए 


पहली बार जब आलिंगन किया 

पाया की 

दुनिया को ऐसे ही पिघलते रहना चाहिए 


आखिरी बार जब तुमने देखा 

महसूस किया की 

ख़त्म हो जाना चाहिए इस दुनिया को 

मेरे आँसुंओं के सैलाब में 

Wednesday, 29 December 2021

ये गम का साल है

 मैं अपने दिल को तसल्ली नहीं देना चाहता। ये दर्द से भरा साल है।  हम सब ने अपने खोये हैं।  बहुतों ने पुराने साथी और आने वाले साथी भी।  मुझे बहुत कुछ सिखा गया २०२१।  मुझे कुछ रिश्तों की अहमियत सिखाया और खोना चुनना सिखा गया।  मै  कहीं नहीं पहुंचना चाहता हूँ लेकिन मुझे समय दौड़ा रहा है और मैं  रुक नहीं रहा।  मैं पूरी कोशिश कर रहा हूँ प्रतीक कुहाड़  के गाने जैसा होना  लेकिन अमित त्रिवेदी के पीछे भाग रहा हूँ।  देखते हैं २०२२ जिसमे मुझे सिर्फ चुनौतियां दिख रहीं हैं मुझे क्या बनाता है।  उम्मीद है मैं खोना सीख लूंगा और फिर कुछ जीत के बाज़ीगर बनूँगा :-)

आने वाला साल मुबारक हो आप सबको !

Saturday, 13 November 2021

दिल्ली सर्दी और तुम

 



तुम्हे याद है रब्बी का वो गीत 

दिल्ली की सड़कों पे बुलेट चलाते सुनते 

मिलते थे हम पुराने किले के पीछे 

सर्दियों में मूंगफली खाते और गिलहरियों को खिलाते 


याद है तुम्हे CP के उस पार्क में मेरा गिटार 

और कॉलेज के उन लड़कों का गाना 

 सर्दी की वो सारी दोपहरें मेरी बाहों में बिताना 

और शाम होते ही रीगल में सिनेमा देखकर 

आखिरी मेट्रो से घर जाना 


याद होगा तुम्हे हमारा पहला आलिंगन 

२५ दिसबर के  वो घने कोहरे में 

जिसने छुपा लिया था मेरे माथे की  पसीने की बूँदें को 

और सिहरा दिया था हमारे शरीरों को 


हौज़ ख़ास में हमारा घंटो जॉन मेयर को सुनना 

और तुम्हारा सिगरेट के हर कश के साथ 

डूब जाना शिवानी, इस्मत और अरुंधति की दुनिया में 

जहाँ तुम और भी खूबसूरत दिखती थी धुंध छटने के बाद 


अगर तुम पढ़ रही होगी इसे आज 

तो दिल्ली सर्दी  में अब नहीं है आज़ाद 

न ले सकोगे तुम सांस और जी सकोगी वो दुनिया 

नहीं भीग सकोगे इस काली धुंध में 

जहाँ न मेरी महक है न मौजूदगी न अहसास 


Thursday, 4 November 2021

हैप्पी दीपावली

 बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं था, मेरा मतलब है यहाँ नहीं लिखा था, वरना टेक्निकल पेपर लिखने का प्रयास करता रहता हूँ असफलताओं के साथ। तो आज दीपावली है, जो इसे मनाते हैं प्रयास करते हैं की आज परिवार के साथ हों कुछ अच्छा समय बिताएं। जैसे दुनिया के लिए क्रिसमस है हमारे लिए दीपावली है।  शाम के साढ़े छह बज रहे हैं, मैं दुनिया से कोसों दूर एक कंप्यूटर की स्क्रीन को देख रहा हूँ , बाहर  रौशनी दिख रही है और पटाखों की आवाज़ आ रही है।  लेकिन ये सब बाहर हो रहा है।  मैं अपने परिवार से दूर एक कंप्यूटर स्क्रीन देख रहा हूँ, ऐसा करने से मेरे डिग्री लेने के संभावनाओं में इज़ाफ़ा हो रहा है।  कोरोना की क्रूरताओं के कारण ऐसा आदेश है की हम अपने परिवार से नहीं मिल सकते, यदि मिले तो एक साल के लिए इस कंप्यूटर स्क्रीन से दूर कर दिए जायेंगे।  प्रतिष्ठित संसथान हैं वो भावनाये नहीं देख सकते, उनकी अपनी मजबूरियां हैं।  खैर उनसे कोई शिकायत भी नहीं।  लेकिन बात यह है की मेरे अंदर क्या चल  रहा है।  १५ साल से घर छोड़ के दौड़ रहा हूँ , कुछ कुछ करने के लिए।  जल्दी ही ऊबने लगता हूँ , इसका मतलब है मन की नहीं कर रहा।  देखिये कब तक ऐसे ही चलेगा , शायद अंत तक।  सुबह से पीं पीं करने वाले व्हाट्सएप सन्देश अब शांत हो गएँ हैं। सब माँ लक्ष्मी का ध्यान कर रहे हैं।  मैं भी कंप्यूटर स्क्रीन पे ध्यान लगाता हूँ।  २०२१ दीपवाली मुबारक सभी को जो मेरे जैसे कंप्यूटर स्क्रीन पर बैठे हुए हैं। 


Saturday, 10 April 2021

यार बनारस , तुम फिर याद आने लगे हो !



वो तुलसी घाट की सीढ़ियों पे नीम्बू की चाय 

और पीपल के पेड़ के नीचे गंगाजी की हवाएँ 

 मेरी डूबती सी मोहब्बत और वो चिलम का  उठता धुआं 

यार बनारस , तुम फिर याद आने लगे हो !


वो बौराये से आम और गरबैठि सी बेर 

शिवरात्रि के धतूरे और पिसी हुई भांग  

वो काशी का अस्सी और रामनगर की लस्सी 

अरे हाँ बाबा की ठंडई   और हमारी लंठई 

यार बनारस , तुम फिर याद आने लगे हो !


वो मसाने की होरी और हम लखेरो की टोरी 

वो गरियाते हुए हमारा केशव का पान 

ख़त्म हो रही मलइयो और छन्नूलाल की  तान 

मुझे याद आ रही है गिरिजा की कजरी महान 


वो रात के सन्नाटे में चांदनी की आवाज़ 

और बदन पे लपेटे अघोरी  राख 

महा शमशान का वो असली  बैराग!


यार बनारस , तुम फिर याद आने लगे हो !

यार बनारस , तुम फिर याद आने लगे हो !

Tuesday, 15 December 2020

अलविदा LC Ram सर



ये वो दौर था जब मैं एक मासूम बचपने से निकल कर शैतानी और दुनियादारी के बचपने  में प्रवेश कर रहा था। जी हाँ वही सातवीं से नौवीं क्लास का समय।  हमारे सातवीं क्लास का पहला दिन और एक डायनामिक शिक्षक क्लास में आते हैं, किसी को खड़ा करते हैं पूछते हैं  क्या नाम है बच्चा ?  पिताजी का नाम ? पिताजी का पेशा ? यहाँ तक तो ठीक था एक नया सवाल आता है।  गांव कहाँ है बच्चा ? ये प्रश्न पूछना हम सबके लिए नया था।  कुछ बच्चे अपने गांव का नाम नहीं बता पाते थे।  आज तो 50 % गांव देखें ही नहीं होंगे।  लेकिन आपको अपने रूट्स से जोड़ना श्री लाल चंद राम जी का उद्देश्य था।  और यह भी जानना की आप जिस क्षेत्र से हैं वहां के संघर्ष कैसे हैं। 

सर को विशेष कर याद किया जाता है उनके डेफिनिशन  प्रेम के कारण।  वो हर चीज़ को डिफाइन करवाते थे और कहीं न कहीं  यूनिक डेफिनिशंस भी होतीं थीँ।  मुझे आज भी diffusion की डेफिनिशन जुबान पे रटी हुई है।  मूवमेंट ऑफ़ मोलेक्युल्स फ्रॉम थे रीज़न ऑफ़ हायर कंसंट्रेशन टू द रीज़न ऑफ़ लोअर कंसंट्रेशन , टिल द कंसंट्रेशन इस  equalized इस कॉल्ड diffusion. ( इग्नोर माय हिंगलिश )

समझा भी देते थे,  थोड़े स्ट्रिक्ट थे लेकिन मन के बहुत अच्छे।  उनकी एक और खास बात थी की समझते हुए एक क्लास आगे का भी पढ़ा देते थे।  इलेक्ट्रान से मेरा इंट्रोडक्शन उन्होने ही कराया और  ऑफबाऊ सिद्धान्त से भी।  मुझे बहुत मानते भी थे :-) . 

खैर हम बड़े होने लगे, इंजीनियर बनने लगे , शायद बन भी गए ,और अब शायद कहीं किसी कोने में कोहरे को देख रहा हूँ खिड़की से दुनिया से दूर। आज सर दिख रहे हैं।  वो धूमिल यादें साफ़ हो रहीं हैं।  

दोपहर में सन्देश आया कहीं से , सर नहीं रहे।  कोरोना लील गया।

 मैंने कई बार सोचा एक बार उनसे मिलूं आशीर्वाद लूँ लेकिन समय नहीं निकला या मैंने नहीं निकाला।  उन्होंने अनगिनत छात्रों को इलेक्ट्रान से और उनके गांव से परिचित कराया। ये लिखते हुए मैं थोड़ा भावुक हूँ , अब लग रहा है वो दौर आने लगा है जब अपने जाने लगे हैं। ईश्वर हमे शक्ति दे इस  दौर को समझने की और LC Ram सर  की आत्मा को शांति प्रदान करे।