Thursday, 9 May 2019

जाऊँगा वहाँ



जाऊँगा वहाँ 
बस जाऊँगा वहीं 

और यहाँ 
किसी के  कंप्यूटर  या मोबाइल पे 
वॉलपेपर बन के रह जाऊँगा 

मेरा नाम  पड़ा रहेगा 
सिनेमा के उन दो टिकटों पे 
जो मैंने कार्नर में  लिए थे 

और  मेरी गंध रहेगी तुम्हे दी हुई 
पुरानी  किताबों में उस मोरपंख के साथ

 क्या पता मुझे याद करेगा वो साधू 
मणिकर्णिका पे चिलम सुलगाते हुए 
जिससे तुम दूर भागती थी 

या मेरी आवाज़ें सुनाई देंगी 
जब भी हवाएं गुज़रेंगी पीपल के उस पेड़ से 
जिसके नीचे गंगा के सामने हमने कसमें खायीं थीं 

शायद सिमट जाऊँगा उन दीयों की रौशनी में 
जो तुमने ऑंखें बंद कर प्रवाहित किये मेरे लिए 
और उड़ जाऊँगा उन कबूतरों के साथ गंगा के उस पार 
बस जाऊँगा वहीँ रह जाऊँगा वहीँ ||