मेरी सबसे खूबसूरत यादों में एक ऐसी जगह है जिसके बारे में सोच के एक सुकून मिलता है। वो दृश्य ही अध्भुत है ,
दो कटहल के पेड़ ,चारों और दूर दूर तक फैले हुए लहलहाते खेत , उनपर बहती एक मदमस्त कर देने वाली बयार , कोयल की कुहुक , पम्पिंग सेट मशीन से झर झर निकलता पानी , दूर से आती अर्जुन कहांर के मुर्गों की बांग, इन सब के बीच एक सन्नाटा जो सुकून देता है ,और उन कटहल के पेड़ के नीचे हलकी से आँखें मीचा मैं अपनी खटिया पर चेहरे पे गमछा डाले हुए एक ऐसे आनंद में जहाँ मुझे सिर्फ शान्ति या कहें तो ईश्वर की प्राप्ति होती है।
ये जगह है मेरे गाँव में मेरा पम्पिंग सेट या वो मशीन जिससे खेतों में पानी भरते हैं। मेरी आँखें भले ही बंद थीं पर पर जो मैं देख पा रहा था वो अविस्मरणीय है।
गेहूं के खेतों के ऊपर जब बसंती हवा चलती है तो बालियां लोटे लेती हैं और उनपर से गुजरती हवा एक अध्भुत आवाज़ पैदा करती है। वो हवा की सनसनाहट मैं आज तक नहीं भूल सका हूँ। पास में कहारों की बस्ती है किसी ने मेरे लिए गुड और पानी का बंदोबस्त कर दिया था , ताज़े गुड का स्वाद और ऐसा दृश्य मुझे सच में ईश्वर के नजदीक ले जा रहा था। मैंने कुछ देर के लिए अपनी आखें बंद की हवा को महसूस किया और सम्पूर्णता की अनुभूति की। जब जाने लगा तो रास्ते में कुछ बच्चों के साथ खेला बात किया और वापिस उनकी गरीबी दरिद्रता को देखा अफ़सोस किया और अपनी जिंदगी में वापिस दाखिला ले लिया।
दो कटहल के पेड़ ,चारों और दूर दूर तक फैले हुए लहलहाते खेत , उनपर बहती एक मदमस्त कर देने वाली बयार , कोयल की कुहुक , पम्पिंग सेट मशीन से झर झर निकलता पानी , दूर से आती अर्जुन कहांर के मुर्गों की बांग, इन सब के बीच एक सन्नाटा जो सुकून देता है ,और उन कटहल के पेड़ के नीचे हलकी से आँखें मीचा मैं अपनी खटिया पर चेहरे पे गमछा डाले हुए एक ऐसे आनंद में जहाँ मुझे सिर्फ शान्ति या कहें तो ईश्वर की प्राप्ति होती है।
ये जगह है मेरे गाँव में मेरा पम्पिंग सेट या वो मशीन जिससे खेतों में पानी भरते हैं। मेरी आँखें भले ही बंद थीं पर पर जो मैं देख पा रहा था वो अविस्मरणीय है।
गेहूं के खेतों के ऊपर जब बसंती हवा चलती है तो बालियां लोटे लेती हैं और उनपर से गुजरती हवा एक अध्भुत आवाज़ पैदा करती है। वो हवा की सनसनाहट मैं आज तक नहीं भूल सका हूँ। पास में कहारों की बस्ती है किसी ने मेरे लिए गुड और पानी का बंदोबस्त कर दिया था , ताज़े गुड का स्वाद और ऐसा दृश्य मुझे सच में ईश्वर के नजदीक ले जा रहा था। मैंने कुछ देर के लिए अपनी आखें बंद की हवा को महसूस किया और सम्पूर्णता की अनुभूति की। जब जाने लगा तो रास्ते में कुछ बच्चों के साथ खेला बात किया और वापिस उनकी गरीबी दरिद्रता को देखा अफ़सोस किया और अपनी जिंदगी में वापिस दाखिला ले लिया।