निर्भय निर्गुण गाऊँगा!
कुछ कहने को दिल करता है
Monday, 8 April 2013
बेनाम दर्द
ऐ दर्द अब ठहर जा , बीते हुए लम्हे गुजर जा
चाह के भी मैं तुझको भूल नहीं पाता
खोया रहता हूँ तुझमे
पर तुझको ढूँढ नहीं पाता
कैसा बेनाम दर्द है ये
एक खंडहर आशियाना है
आईना मेरा है रूह तेरी है
और अक्स भी तेरा ही नज़र आता है??
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